हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, मरहूम आयतुल्लाह हायरी शीराज़ी ने नमाज़ की गुणवत्ता पर ज़ोर देते हुए हमें यह याद दिलाया है कि अगर हम नमाज़ को ख़ूबसूरती से और आदाब के साथ पढ़ें तो न सिर्फ़ अल्लाह की रज़ामंदी हासिल होती है, बल्कि यह आने वाली नस्लों के दिलों में भी मोहब्बत और रुझान पैदा कर सकती है।
मरहूम आयतुल्लाह हायरी शीराज़ी फरमाते हैं,अपनी नमाज़ को खूबसूरत तरीक़े से अदा करें। एक साफ़ सुथरी और सलीकेदार सज्जादा (जानमाज़) बिछाएं नमाज़ के लिए एक अलग कमरा या खास जगह तय करें वह जगह ख़ुशबूदार हो।
आप जब अपनी दिल से पढ़ी गई प्यारी नमाज़ अदा करते हैं, तो आपका बच्चा भी उस नमाज़ को पसंद करता है। जिस तरह अल्लाह को वह नमाज़ पसंद आती है उसी तरह आपके बच्चे को भी पसंद आती है।
लेकिन जब आप जल्दी-जल्दी और बेमन से नमाज़ पढ़ते हैं तो न अल्लाह को पसंद आती है और न ही बच्चे को।ऐसी नमाज़ पढ़ो जो अल्लाह को पसंद आए, तभी बच्चे को भी पसंद आएगी। क्योंकि बच्चे की फितरत अल्लाही होती है।
स्रोत: राह-ए-रुश्द, भाग جلدपेज 97
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